गोरखपुर
खजनी में सरकारी कम्बल घोटाला: चहेते प्रधानों की झोली भरी, गरीब ठंड में ठिठुरते काट दी सीजन
गोरखपुर। जनपद के दक्षिणी छोर पर बसी खजनी तहसील में सरकारी शीत राहत योजना की पोल खुल गई है। कड़ाके की ठंड निकल रही है लेकिन गरीब, असहाय और पात्र परिवारों के लिए भेजे गए दर्जनों-सैकड़ों सरकारी कम्बल राजस्व विभाग के चहेतों, प्रभावशाली ग्राम प्रधानों और कुछ स्थानीय बाहु बलियो की ‘झोली’ में समा गए। असल जरूरतमंदों तक एक भी कम्बल नहीं पहुंचा, जबकि कागजों पर वितरण का पूरा दिखावा रचा गया।
स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों के अनुसार, कई गांवों में पात्र लाभार्थियों की सूची तो तैयार हुई, लेकिन नाम छापने, जांच-पड़ताल या बदनामी के डर से वितरण रुक गया। महीनों से तहसील, एसडीएम कार्यालय और कचहरी के चक्कर काटते-काटते गरीब परिवार थक-हारकर लौट आए। ठंड से ठिठुरते बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अलाव जलाकर गुजारा करने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी कम्बल सिर्फ फाइलों और रिकॉर्ड में ‘जीपीएस’ से जलाए गए अलाव के नाम पर सिमटकर रह गए।
यह मामला महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार और पक्षपात का गंभीर उदाहरण है। प्रभावशाली प्रधानों को लाभ पहुंचाने के लिए गरीबों के हक को हड़प लिया गया। ठंड बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ गए हैं, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी सोई हुई नजर आ रही है।
स्थानीय निवासियों ने उच्चाधिकारियों से तत्काल जांच, दोषी अधिकारियों-प्रधानों पर सख्त कार्रवाई और असल पात्रों को कम्बल उपलब्ध कराने की मांग की है। यदि ऐसे घोटाले जारी रहे, तो सरकारी योजनाओं पर जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। खजनी तहसील की यह घटना शीतलहर के बीच गरीबों के साथ हो रहे अन्याय का जीता-जागता प्रमाण है। प्रशासन को अब जागना होगा—वरना कागजी राहत असल ठंड से कभी नहीं बचा पाएगी।
