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वाराणसी

काशी में बनेगा ‘साहित्यिक पथ’, संत से लेकर समकालीन रचनाकारों तक को मिलेगा सम्मान

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संगीत पथ की तर्ज पर वीडीए की नई पहल, ऐतिहासिक दोहों और विचारों से सजेगी दीवारें

वाराणसी। काशी के साहित्यिक गौरव को नया आयाम देने की तैयारी शुरू हो गई है। संगीत पथ की तर्ज पर अब शहर में ‘साहित्यिक पथ’ विकसित किया जाएगा, जो काशी के उन साहित्यकारों को समर्पित होगा, जिन्होंने अपनी रचनाओं से न सिर्फ बनारस, बल्कि भारतीय साहित्य को नई दिशा दी।

इस पथ पर संत कबीर, गोस्वामी तुलसीदास, संत रविदास, जगन्नाथ दास रत्नाकर, भगवान दास, गोपी नाथ कविराज, सुदामा पांडेय ‘धूमिल’, भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, मुंशी प्रेमचंद, हजारी प्रसाद द्विवेदी, श्याम सुंदर दास समेत अन्य प्रमुख साहित्यकारों की स्मृति और योगदान को दर्शाया जाएगा।

विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। साहित्यिक पथ पर आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा संबंधित साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व का उल्लेख किया जाएगा। दीवारों पर उनके ऐतिहासिक दोहे और साहित्यिक विचार उकेरे जाएंगे, जिससे पथ न केवल सौंदर्य से परिपूर्ण होगा, बल्कि ज्ञानवर्धक भी।

प्रदेश के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में सुझाव दिया था कि संगीत पथ की तर्ज पर एक साहित्यिक पथ भी तैयार किया जाए। उनके अनुसार, जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर स्थान तय किया जाएगा। संभावित रूप से यह पथ यूपी कॉलेज के आसपास, मलदलिया से फातमान मार्ग के बीच विकसित किया जाएगा।

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