वाराणसी
काशी की गलियों में घूमे संजय मिश्रा, चाय की दुकान पर बनाया सैंडविच
वाराणसी। बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा बीती शाम वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने शहर की गलियों और गंगा घाटों पर पैदल घूमकर बनारसी जीवनशैली को करीब से महसूस किया। इस दौरान वह एक चाय की टपरी पर पहुंचे, जहां आम लोगों के बीच बैठकर चाय पी और उनसे बातचीत की। कुछ देर बाद दुकान के भीतर जाकर उन्होंने खुद अपने हाथों से सैंडविच तैयार किया और वहीं खड़े होकर उसे खाया।
बताया गया कि संजय मिश्रा शाम करीब चार बजे काशी पहुंचे थे। घाटों का भ्रमण करने के बाद वह काशी विश्वनाथ धाम से लगभग आधा किलोमीटर दूर ब्राह्मनाल स्थित मौली टी स्टाल पहुंचे। यहां उन्होंने मौजूद लोगों और बच्चों से सहज तरीके से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बनारस के खानपान का अलग ही मिजाज है और उन्हें खाना बनाना पसंद है, जो उनके लिए सुकून देने वाला अनुभव है।

बुधवार सुबह अभिनेता काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर के गर्भगृह में पुजारी द्वारा उनकी पूजा कराई गई और भैरव अष्टक का पाठ भी हुआ। करीब 15 मिनट तक मंदिर में रहने के बाद उन्होंने कहा कि यहां दर्शन करने से मन और शरीर दोनों हल्का महसूस होता है। उन्होंने यह भी कहा कि काशी लगातार बदल रही है, लेकिन उसकी आत्मा आज भी वैसी ही बनी हुई है और यहां आने से उन्हें आंतरिक शांति मिलती है।
दर्शन के बाद वह पागल बाबा के साथ भी घूमे और उनके साथ चाय पी। संजय मिश्रा ने कहा कि बनारस ऐसा शहर है, जो हर व्यक्ति को उसकी चाह के अनुसार देता है, लेकिन इसके लिए खुद को पूरी तरह इस शहर के हवाले करना पड़ता है। उन्होंने अपने बनारस से गहरे लगाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी रग-रग में यह शहर बसा है और यहां की बचपन की यादें तथा खुशबू आज भी उनके जीवन को महकाती हैं। इसके बाद वह बुधवार सुबह करीब नौ बजे मुंबई के लिए रवाना हो गए।

संजय मिश्रा का जन्म वर्ष 1963 में बिहार के दरभंगा में हुआ था। उनके पिता शंभूनाथ मिश्रा पत्रकार थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी स्थित केंद्रीय विद्यालय, बीएचयू परिसर में हुई। आगे उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से वर्ष 1989 में अभिनय का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन धारावाहिक ‘चाणक्य’ से की और इसके बाद अनेक फिल्मों व धारावाहिकों में काम किया।
फिल्म ‘आंखों देखी’ के लिए उन्हें वर्ष 2015 में फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर से सम्मानित किया गया। इसके अलावा ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’, ‘धमाल’, ‘प्रेम रतन धन पायो’ और ‘टोटल धमाल’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। वह फिल्म ‘राखोश’ में मुख्य भूमिका भी निभा चुके हैं, जिसे भारत की पहली पीओवी तकनीक पर आधारित हिंदी फिल्म माना जाता है।
वाराणसी से उनके विशेष जुड़ाव का कारण उनकी स्कूली शिक्षा का यहीं होना है। यही वजह है कि जब भी उन्हें अपने काम से समय मिलता है, वह काशी आकर समय बिताना पसंद करते हैं और इस बार की यात्रा में भी उनका यह भावनात्मक रिश्ता साफ नजर आया।
