वाराणसी
कानून-व्यवस्था कायम रखने को चोर-डकैत और भिखारी तक बनना पड़ता है : मोहित अग्रवाल
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम के गर्भ गृह में पुजारियों के वेश में पुलिसकर्मियों की तैनाती की व्यवस्था छह साल बाद दोबारा लागू हुई है। इससे पहले मार्च 2018 में इस तरह की व्यवस्था प्रैक्टिकली लागू की गई थी, लेकिन कुछ समय के बाद ही स्थिति जस की तस हो गई थी। वर्तमान समय में वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने यह व्यवस्था फिर से लागू कर दी है। लेकिन इस व्यवस्था के लागू होने के बाद विपक्ष उन्हें और मोदी सरकार को घेर रहा है।
इस दौरान पत्रकारों को जानकारी देते हुए कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि, विश्वनाथ धाम का कायाकल्प होने के बाद से ही यहां श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले 1 साल में 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए हैं।
उन्होंने अर्चक परिधान में पुलिस कर्मियों की ड्यूटी को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि, जहां तक रही बात पुलिसकर्मियों को अर्चक परिधान में ड्यूटी करने की तो, पुलिसकर्मियों को पुजारी के वेश में गर्भ गृह और उसके इर्द-गिर्द इसलिए तैनात किया गया है ताकि वह देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क गाइड का काम कर सकें। श्रद्धालु भी पुलिस की अपेक्षा पुजारियों से ज्यादा सहज महसूस करते हुए नि:संकोच कुछ भी पूछ लेते हैं।

इन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने से पहले हमने इन्हें परस्पर रूप से ट्रेनिंग दी है। विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात मृदुभाषी, व्यवहार कुशल और यहां की अच्छी जानकारी रखने वाले 24 महिला-पुरुष पुलिसकर्मियों को चयनित कर उनकी तीन पारियों में ड्यूटी लगाई गई है।
विपक्ष द्वारा पुलिस कर्मियों को अर्चक परिधान के रूप में ड्यूटी करने से जुड़े सवाल के जवाब में मोहित अग्रवाल ने बताया कि, लोकहित और शांति व कानून व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए पुलिस न जाने क्या-क्या जतन करती है। चोर-डकैत से लेकर भिखारी तक बन कर निगरानी करनी पड़ती है। विश्वनाथ धाम में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है। ऐसे में व्यवस्था बनाए रखने के लिए गर्भ गृह व उसके आसपास धोती-कुर्ता में उनकी तैनाती में क्या बुराई है ? उन्होंने आगे बताया कि, पुलिसकर्मियों को कपड़े की व्यवस्था सरकारी फंड से कराई गई है। जो भी पुलिसकर्मी इस ड्यूटी के लिए तैनात किए जाएंगे, उन्हें दो सेट पुजारी के कपड़े सरकारी फंड से उपलब्ध कराए जाएंगे।
फिलहाल इस व्यवस्था के लागू होने के बाद, श्रद्धालुओं के फीडबैक के साथ ही मंदिर प्रशासन और डीसीपी सुरक्षा के माध्यम से हम नई व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जो खामियां सामने आएंगी, उन्हें तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा। परिणाम सार्थक और सकारात्मक रहा तो श्रद्धालुओं के हित में यही प्रयास किया जाएगा कि यह व्यवस्था स्थायी हो जाए।
