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गोरखपुर

एसआईआर में उलझा राजस्व अमला, दाखिल-खारिज से वरासत तक के काम ठप

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“बाबू कहां बैठते हैं, कोई बताने वाला नहीं” तहसील में भटकती रही वृद्धा

गोरखपुर। जनपद के सभी तहसीलों और राजस्व कार्यालयों में इन दिनों केवल एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का ही काम चलता नजर आ रहा है। हालत यह है कि दाखिल-खारिज, पैमाइश, वरासत, खतौनी सुधार जैसे आम नागरिकों से जुड़े जरूरी कार्य लगभग ठप हो गए हैं। एसआईआर के कारण अधिकारी, कर्मचारी से लेकर लेखपाल तक पूरी तरह इसी प्रक्रिया में लगाए गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसी क्रम में गुरुवार को एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला तहसील सदर के एक अधिकारी के पास पहुंचीं। बुजुर्ग महिला ने टूटी आवाज में अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वह कई महीनों से चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार यही जवाब मिलता है कि “एसआईआर चल रहा है, बाद में आइए।” महिला ने बताया कि बाबू कहां बैठते हैं, यह भी कोई ठीक से बताने वाला नहीं है। तारीख पर तारीख दी जा रही है और ब्रोकरों द्वारा बार-बार परेशान किया जा रहा है।

बुजुर्ग महिला की हालत देखकर तहसील में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। महिला ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर बार-बार तहसील आना उनके लिए बहुत कठिन हो गया है। इस पर तहसील के साहब ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा, माता जी, आप परेशान मत होइए। कोर्ट बैठेगा, जो सही होगा, वही किया जाएगा। अभी हम सभी एसआईआर (SIR) के काम में लगाए गए हैं।

तहसील अधिकारी ने बुजुर्ग महिला को ब्रोकरों से दूर रहने की भी सख्त हिदायत दी और कहा कि किसी को भी जमीन या कागजात न सौंपें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही एसआईआर का दबाव कम होगा, उनके प्रकरण पर विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से एसआईआर अभियान शुरू हुआ है, तब से हर तहसील में यही स्थिति बनी हुई है। कर्मचारी, अधिकारी और राजस्व अमला पूरी तरह एसआईआर में व्यस्त है, जबकि आम जनता अपने जरूरी कार्यों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण अभियान के साथ-साथ आम जनता के रोजमर्रा के कार्यों को कैसे संतुलित करेगा, ताकि किसी बुजुर्ग मां को अपनी पीड़ा लेकर तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।

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