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गोरखपुर

एक ही जमीन की बार-बार रजिस्ट्री पर लगेगी लगाम, योगी सरकार का बड़ा फैसला

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गोरखपुर । उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री के मामलों पर सख्ती करते हुए Yogi Adityanath की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब बिना खतौनी और मालिकाना हक की पूरी जांच के किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। फर्जी, विवादित और प्रतिबंधित जमीन की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य सरकार रजिस्ट्रेशन कानून में संशोधन करने जा रही है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इससे जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में काफी कमी आएगी तथा आम लोगों को राहत मिलेगी।

स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Ravindra Jaiswal ने बताया कि वर्तमान समय में कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें वास्तविक मालिक के अलावा अन्य व्यक्ति भी उसी जमीन को बेच देते हैं। इसके अलावा प्रतिबंधित या निषेधित संपत्ति की बिक्री, अपने अधिकार से अधिक जमीन का विक्रय, कुर्क की गई संपत्ति की रजिस्ट्री तथा केंद्र या राज्य सरकार की भूमि तक की रजिस्ट्री हो जाने जैसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बाद में बड़े विवाद खड़े हो जाते हैं और लोगों को वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने Registration Act 1908 और उससे संबंधित नियमावली में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
मंत्री के अनुसार वर्तमान में इस कानून की धारा-35 के तहत उप निबंधक को रजिस्ट्रेशन से इनकार करने के सीमित अधिकार ही प्राप्त हैं। इसलिए नए संशोधन के तहत अधिनियम में धारा-22 और धारा-35 के बाद नई धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ी जाएंगी। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद उप निबंधक को संदिग्ध, विवादित या फर्जी दस्तावेजों की रजिस्ट्री रोकने का अधिक अधिकार मिलेगा।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री से पहले खतौनी, मालिकाना हक और अन्य कानूनी दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। यदि जमीन विवादित, कुर्क या सरकारी स्वामित्व वाली पाई जाती है तो उसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। सरकार का दावा है कि इस कदम से फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और जमीन खरीदने वाले लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के संशोधन कर जमीन से जुड़े विवादों पर नियंत्रण की कोशिश की जा चुकी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक को विधानमंडल में पेश किया जाएगा, जहां स्वीकृति मिलने के बाद नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी।

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