वाराणसी
एक रुपये के सिक्के पर बिठाई जाती हैं विदेशी अतृप्त आत्माएं
वाराणसी। काशी में पितृ पक्ष के अवसर पर अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आ रहे हैं। विधि-विधान से पूजन कर पितरों का पिंड दान किया जा रहा है। पिशाच मोचन पर त्रिपिंडी के लिए सैकड़ों विदेशी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
वर्षों से अतृप्त आत्माओं को मुक्ति दिलाने के लिए दुनिया भर के लोग काशी का रुख कर रहे हैं। यहां अकाल मृत्यु के बाद दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए त्रिपिंडी का श्राद्ध कराया जाता है।
काशी के पिशाचमोचन तीर्थ पर अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस जैसे विकसित देशों के नागरिक भी नारायण बलि और दशमहाविद्या जैसे कर्मकांड कराने आते हैं। पितृपक्ष में विदेशियों की अतृप्त आत्माओं की शांति के लिए बुकिंग नवंबर से मार्च के बीच होती है। एक रुपये के सिक्के को पीपल के पेड़ पर रखकर पितरों का उधार चुकाया जाता है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और मॉरीशस से आने वाले विदेशियों की संख्या लगभग 300 से 400 है। तीर्थ पुरोहित नीरज पांडेय ने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं का त्रिपिंडी, नारायण बलि के साथ दशमहाविद्यालय का हवन कराया जाता है।
पिशाचमोचन कुंड पर आत्माओं का उधार चुकाया जाता है। गरुण पुराण के काशी खंड में इस कुंड का उल्लेख मिलता है, जहां पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। तीर्थ पुरोहित राजेश मिश्र ने बताया कि पीपल के पेड़ में ठोंके गए असंख्य सिक्के और कील किसी न किसी अतृप्त आत्मा का प्रतीक हैं। पेड़ पर मृत व्यक्ति की तस्वीर या प्रतीक चिह्न भी लगाया जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को दी जाएगी विदाई
आश्विन मास की अमावस्या पर 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध से पितृगण प्रसन्न होकर जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद दिया । अंतिम दिन गंगा के तट से लेकर पिशाचमोचन कुंड और घरों में श्राद्ध व तर्पण किया गया। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या 20 सितंबर रात 12 बजकर 17 मिनट से 21 सितंबर देर रात 01 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
इस पावन अवसर पर विदेशी और भारतीय श्रद्धालु विधि-विधान से पितृ पक्ष का पालन कर रहे हैं और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए विभिन्न कर्मकांड करवा रहे हैं।
