गाजीपुर
असीमित दैवीय चमत्कारों से परिपूर्ण है योगमाया राजमति देवी
भांवरकोल (गाजीपुर) जयदेश। ग्राम सभा मसोन के उत्तर-पश्चिमी सिवान के एकांत जंगलों में स्थित योगमाया राजमति देवी का सिद्धपीठ अपने चमत्कारों और आस्था के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन आज भी विकास की दृष्टि से उपेक्षित है।
मान्यता है कि प्राचीन काल में वट-पीपल के खोड़रे से देवी की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। कहा जाता है कि राजा राजेंद्र प्रथम को स्वप्न में देवी के दर्शन हुए, जिसके बाद खुदाई में मूर्ति प्राप्त हुई और वहीं मंदिर का निर्माण कराया गया।

समय के साथ इस सिद्धपीठ का महत्व बढ़ता गया। स्थानीय पुजारी चंद्रभूषण जी ने भक्तों के सहयोग से मंदिर का भव्य निर्माण कराया। वर्ष 2013 में अक्षय तृतीया के दिन नई मूर्ति स्थापित करने की योजना बनी, लेकिन उसी रात देवी ने स्वप्न में प्रकट होकर पुरानी मूर्ति को ही स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्राचीन मूर्ति का सौंदर्यीकरण कर विधि-विधान से गर्भगृह में पुनः स्थापित किया गया।
नवरात्र के अवसर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्त मन्नतें मांगते हैं और पूर्ण होने पर त्रिशूल चढ़ाते हैं। इस प्रकार यह सिद्धपीठ आस्था, परंपरा और चमत्कारों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
